IPS हरप्रीत कौर का तबादला ‘ के बाद नेता जी सोये चैन के नींद । जेल में रेड के बाद फोन बंद हो गया था

मुज़फ़्फ़रपुर से राहुल कुमार की रिपोर्ट

शनिवार को नीतीश कुमार की सरकार ने सात आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया . बिहार में बेकाबू अपराध के बीच ये तबादले हुए . इन तबादलों की चपेट में मुजफ्फरपुर की एसएसपी हरप्रीत कौर भी आ गईं . हरप्रीत कौर कोमुजफ्फरपुर से समस्‍तीपुर भेजा गया है . फौरी तौर पर माना गया कि हरप्रीत कौर पर गाज मुजफ्फरपुर में पूर्व मेयर समीर कुमार की एके – 47 से हुई हत्‍या के कारण गिरी है . पर, हरप्रीत के तबादले को लेकर अब कई और बातें शुरु हो गईं हैं .हरप्रीत कौर के तबादले के सरकारी फैसले पर बहुत सारे लोग अवाक् हैं . सरकार को दबाव में मान रहे हैं . दबाव भी भीतरी है . कारण ‘नेताजी’ माने जा रहे हैं . ये ‘नेताजी’ मधेपुरा के सांसद पप्‍पू यादव नहीं हैं, जिनसे पिछले दिनों एसएसपी हरप्रीत कौर का तगड़ा विवाद हुआ था . दूसरे बड़े ‘नेताजी’ हैं . बिहार सरकार में हैं . तेजस्‍वी यादव और पप्‍पू यादव तो हरप्रीत कौर के तबादले पर सवाल खड़े कर रहे हैं .जानकार कह रहे हैं कि आईपीएस हरप्रीत कौर की इमेज ऐसे आईपीएस की नहीं है, जिसे कोई जबरिया डिक्‍टेट कर सके . ऐसा, उनके बॉस भी नहीं कर सकते . वह विवेक से काम करती हैं . मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम महापाप के महापापी ब्रजेश ठाकुर को बिना समय गंवाए अरेस्‍ट किया . कोई मोहलत नहीं दी .मुजफ्फरपुर महापाप की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई . सीबीआई के अधिकारी भी मानते हैं कि मुजफ्फरपुर पुलिस ने सही दिशा में जाकर अपने वक्‍त तक की जांच की . केस को ठीक से सजाया . बस, आगे की कार्रवाई शेष बची रह गई थी, जिसे सीबीआई को पूर्ण करना है अब मामले की जांच की मानीटरिंग सुप्रीम कोर्ट कर रही है .याद करें, ब्रजेश ठाकुर गिरफ्तार किए जाने के बाद कोर्ट के आदेश से पहले अस्‍पताल और बाद में मुजफ्फरपुर जेल भेजा गया . मुजफ्फरपुर पुलिस ने जेल में रेड डाली . इस रेड में ब्रजेश ठाकुर के पास से कोई मोबाइल तो नहीं मिला, लेकिन संपर्क करने को मोबाइल नंबरों की लिस्‍ट मिली . इसमें कई बड़े लोगों के नंबर थे . इन नंबरों में ही बिहार सरकार के ‘नेताजी’ का नाम भी बताया जा रहा है . मुजफ्फरपुर से ही ताल्‍लुकात है ‘नेताजी’ का .बताने वाले कहते हैं कि ‘नेताजी’ हरप्रीत कौर के रडार पर आ गए थे . इस कारण सरकारी नेताजी ऐसे डरे कि अपना जाना – पहचाना मोबाइल नंबर ही बंद कर लिया . आज भी बंद ही बताया जा रहा है . वे अपने पीए के मोबाइल से ही अपना काम चला रहे हैं . परेशान नेताजी किसी तरीके से हरप्रीत कौर से पिंड छुड़ाना चाहते थे .रप्रीत कौर के तबादले के पीछे दूसरी जुड़ी बात पूर्व मेयर समीर कुमार की हत्‍या से संबद्ध बताई जा रही है . जांच इस दिशा में आगे बढ़ रही थी कि मर्डर की प्‍लानिंग में कई ताकतें शामिल थीं . एक नेताजी के बेटे के साथ विवाद को भी खंगाला जा रहा था . बाहर गए दूसरे नेताजी भी र‍डार पर थे . सहारा इंडिया और कल्‍याणी की जमीन के सौदे की पड़ताल चल रही थी .जानकारी तो यहां तक थी कि सहारा इंडिया के सौदे में सौ करोड़ से अधिक की ब्‍लैक मनी लखनऊ तक पहुंचाई गई . इसमें भी कुछ लोचा हुआ था . जांच आगे बढ़ती और चेहरे बेनकाब होते, इसके पहले ही हरप्रीत कौर को मुजफ्फरपुर से विदा करा दिया गया . विदा कराने वाले शनिवार 29 सितंबर की रात बहुत दिनों के बाद चैन से सोये होंगे .

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