शोभित श्रीवास्तव
लखीमपुर- खीरी
आज हम बात करने वाले है कि हमारे गाँव, शहर,कस्बे के स्कूलों में बच्चो को शिक्षक पढ़ा रहे है और बच्चो के अभिभावक स्कूल में नाम लिखा देना ही अपनी जिम्मेदारी समझते है वो अपने बच्चो का नाम स्कूल में लिखा देने के बाद अभिभावक ये सोचते है कि अब सारी जिम्मेदारी शिक्षक की हो गई है कि वो उनके बच्चो को अच्छी शिक्षा दे। क्या अभिभावकों का इतना ही फर्ज है कि वो अपने बच्चो का स्कूल में नाम लिखा दे और फिर ये समझे कि शिक्षक उनके बच्चो को शिक्षित करे। शिक्षक अपना पूरा सहयोग करते भी है मेहनत से पढ़ते है।
    लेकिन
अभिभावकों को भी अपने बच्चो का ध्यान रखना चाहिए कि वो कितना समय घर पर पढ़ाई करते है क्या जो स्कूल में शिक्षक द्वारा कार्य करने के लिए दिया जाता है वो करते है या नही?जब हमारे बच्चे पढ़ने में कमजोर होते है तो हम शिक्षक को ही दोषी ठहराते हैं। हमे अपने बच्चो को समय देना चाहिए अगर आप उनका भविष्य अच्छा देखना चाहते हो तो आपको अपने बच्चो को समय देना चाहिए। जब आप उन्हें समय देंगे तभी आप उन्हें समझ पायेंगे की वह क्या करना चाहते है।

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