विनय कुमार मिश्र गोरखपुर ब्यूरों।
शिवपुर सहबाजगंज, पादरी बाजार के
पी के टेन्ट हॉउस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अन्तिम दिवस (7 वे दिन ) को हिमाचल प्रदेश से पधारे युवा संन्यासी कथा व्यास स्वामी राम शंकर महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को सत्कर्म अर्थात सत्य कर्म की श्रेणी में रखा गया हैं क्योकि इस कथा के श्रवण से हम अनित्य संसार के प्रति हृदय में व्याप्त मोह को छोड़ पाने में समर्थ होते है और नित्य अजर अमर परमात्मस्वरूप अपनी आत्मा और ब्रह्मः के साक्षात्कार में सफल होते है। उन्होंने आगे बताया कि जीवन का कुछ भी पता नहीं कि देह में चल रही श्वास कब रूक जाये और सदा सदा के लिए इस शरीर से हमारा वियोग हो जाये इस लिए जो समय अवसर परमात्मा की कृपा से आज हमें प्राप्त हुआ है उसे व्यर्थ न करे। अपने आत्मा की मुक्ति भक्ति स्वयं के शुद्ध स्वरूप को जानने अनुभव करने में लगाए रखे। साधना में नैरंतर्य होगा तभी जा कर हम आध्यात्मिक जीवन में सफल हो सकेंगे इस बात को याद रखे संसार में आप भौतिक रूप से चाहे जितने सफल सम्पन्न हो जाये पर जब तक आतंरिक आध्यात्मिक यात्रा में सफल नहीं होंगे तब तक दुःख का साथ जीवन में बना रहेगा। परीक्षित जी को 7 दिन पूर्व जैसे ही पता चल गया कि मेरी मृत्यु अमुक तिथि को निश्चित है वैसे ही घर परिवार का त्याग कर परमात्मा के भजन कथा श्रवण में पूरी तरह लीन हो गये। भागवत कथा के श्रवण मनन से संसार के जितने भी आकर्षण थे सब के सब नष्ट हो जाते है मृत्यु से पूर्व अमरत्व का अनुभव कर कर लिये , इस बात को बताने का ये आशय है कि ईश्वर के अनुभव के लिये बहुत लम्बे काल तक साधना करनी पड़े, ये जरुरी नहीं है हमारे भीतर दृढ वैराग्य और भक्ति युक्त समर्पण की भावना हो तो इतने में ही परमात्मा प्रसन्न हो जाते है।परीक्षित सौभाग्यशाली थे कि उन्हें पता चल गया कि मेरी मृत्यु अमुक तिथि को है हमारा इतना सौभाग्य नहीं है कि हमें मृत्य दिवस का ज्ञान मृत्य हो और उस दिन से हम सतर्क होव हमें तो हर दिन सर्तक रहना हो हर क्षण को सार्थक करना होगा नहीं तो निश्चित रूप से जीवन निरर्थक हो जायेगा।
पी के टेन्ट हॉउस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अन्तिम दिवस (7 वे दिन ) को हिमाचल प्रदेश से पधारे युवा संन्यासी कथा व्यास स्वामी राम शंकर महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को सत्कर्म अर्थात सत्य कर्म की श्रेणी में रखा गया हैं क्योकि इस कथा के श्रवण से हम अनित्य संसार के प्रति हृदय में व्याप्त मोह को छोड़ पाने में समर्थ होते है और नित्य अजर अमर परमात्मस्वरूप अपनी आत्मा और ब्रह्मः के साक्षात्कार में सफल होते है। उन्होंने आगे बताया कि जीवन का कुछ भी पता नहीं कि देह में चल रही श्वास कब रूक जाये और सदा सदा के लिए इस शरीर से हमारा वियोग हो जाये इस लिए जो समय अवसर परमात्मा की कृपा से आज हमें प्राप्त हुआ है उसे व्यर्थ न करे। अपने आत्मा की मुक्ति भक्ति स्वयं के शुद्ध स्वरूप को जानने अनुभव करने में लगाए रखे। साधना में नैरंतर्य होगा तभी जा कर हम आध्यात्मिक जीवन में सफल हो सकेंगे इस बात को याद रखे संसार में आप भौतिक रूप से चाहे जितने सफल सम्पन्न हो जाये पर जब तक आतंरिक आध्यात्मिक यात्रा में सफल नहीं होंगे तब तक दुःख का साथ जीवन में बना रहेगा। परीक्षित जी को 7 दिन पूर्व जैसे ही पता चल गया कि मेरी मृत्यु अमुक तिथि को निश्चित है वैसे ही घर परिवार का त्याग कर परमात्मा के भजन कथा श्रवण में पूरी तरह लीन हो गये। भागवत कथा के श्रवण मनन से संसार के जितने भी आकर्षण थे सब के सब नष्ट हो जाते है मृत्यु से पूर्व अमरत्व का अनुभव कर कर लिये , इस बात को बताने का ये आशय है कि ईश्वर के अनुभव के लिये बहुत लम्बे काल तक साधना करनी पड़े, ये जरुरी नहीं है हमारे भीतर दृढ वैराग्य और भक्ति युक्त समर्पण की भावना हो तो इतने में ही परमात्मा प्रसन्न हो जाते है।परीक्षित सौभाग्यशाली थे कि उन्हें पता चल गया कि मेरी मृत्यु अमुक तिथि को है हमारा इतना सौभाग्य नहीं है कि हमें मृत्य दिवस का ज्ञान मृत्य हो और उस दिन से हम सतर्क होव हमें तो हर दिन सर्तक रहना हो हर क्षण को सार्थक करना होगा नहीं तो निश्चित रूप से जीवन निरर्थक हो जायेगा।


Post A Comment: