गोरखपुर ब्यूरों। सूर्योपासना का महापर्व छठ बुधवार को सुबह उगते हुए सूर्य को अर्द्ध देने के साथ सम्पन्न हो गया। भोर से जल में खड़ी रह कर महिलाओं ने सूर्य को अर्द्ध दिया और परिवार के लिए मंगल कामनाएँ की। इस पर्व के महात्म्य और 60 घंटे की कठिन तपस्या के बाद व्रती सुहागिन महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाने के बाद ही कुछ अन्न ग्रहण करती है । रविवार से खाए नहाए से शुरू हुआ यह व्रत बुधवार को जाकर अपनी पूर्णता को प्राप्त किया। हालांकि इसके लिए महिलाओं ने मंगलवार से कठिन तपस्या शुरू की थी और शाम को अस्ताचल सूर्य को नदी पोखरे और घर के आसपास निर्मित जलाशय में खड़ी रह कर सूर्य को अर्घ्य दिया। बिना जल के इस व्रत को धारण करने वाली महिलाएं इसकी तैयारी में करीब 60 घंटे से ज्यादा का भी समय व्यतीत करती हैं, क्योंकि इसकी पूजा पद्धति और प्रसाद की शुद्धता इन्हें बेचैन रखती है।
बुधवार सुबह 3 बजे से ही घाट पर यह महिलाएं अपने आरक्षित स्थान पर पहुंच जाती हैं गई और बनाई गई बेदी पर पुष्प और पकवान को अर्पित कर यह पूरी तरह से भक्ति में लीन हो भगवान भास्कर के उदय होने का इंतजार करती हैं। इस दौरान इनके परिवार के लोगों का भी समर्पण देखने लायक होता था। जल में खड़ी होकर मातायें जब सूर्य के निकलने का इंतजार करती हैं तो बेटे भी मां को अर्घ्य के लिए दूध और जल हाथ मे लिए खड़े रहते हैं।
बुधवार सुबह 3 बजे से ही घाट पर यह महिलाएं अपने आरक्षित स्थान पर पहुंच जाती हैं गई और बनाई गई बेदी पर पुष्प और पकवान को अर्पित कर यह पूरी तरह से भक्ति में लीन हो भगवान भास्कर के उदय होने का इंतजार करती हैं। इस दौरान इनके परिवार के लोगों का भी समर्पण देखने लायक होता था। जल में खड़ी होकर मातायें जब सूर्य के निकलने का इंतजार करती हैं तो बेटे भी मां को अर्घ्य के लिए दूध और जल हाथ मे लिए खड़े रहते हैं।


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