किसान और कुशासन ने छीना शिवराज से सिंहासन।




ब्यूरो रिपोर्ट अमित कुमार मिश्रा



मध्य प्रदेश सहित पांच राज्यों में संपन्न चुनाव में मतदाता का निर्णय भाजपा को धूल चटाने वाला रहा है। आये चुनाव नतीजों की बजह किसान आंदोलन के संघर्ष का वोट में बदलने का परिणाम है। चुनावी इतिहास में पहली बार किसान किसानी के मुद्दों को सामने करके मतदान किया और अवतार होने का भ्रम पालने वालों की औकात समझा दी। किसानों का यह ऐतिहासिक निर्णय मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बुनियाद का पत्थर साबित ही होगा देश की राजनीति के लिए भी मील का पत्थर होगा। यह शिलालेख किसानों की अनदेखी करने वाले राजनैतिक दलों को ठोकर का काम करेगा। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई की भाजपा सरकार को कुर्सी से उतारने का एक प्रमुख कारण किसान की संपूर्ण कर्ज मुक्ति और उपज का सही दाम न देना रहा है। भावांतर और फसल बीमा में धोखा खाने के बाद किसानों को आजतक स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश अनुसार उपज का सही दाम न देना, किसानों, आदिवासियों की जमीन को जबरन कौड़ियों के भाव छीनकर उद्योगपति को देकर विस्थापित कर देना भी सत्ताधारी भाजपा को मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में कुर्सी से उतारने का कारण रहा है।
मध्य प्रदेश से 15 साल बाद भाजपा की सत्ता से विदाई हुई है। एक दशक से अधिक समय से शिवराज सिंह चौहान राज्य के मुख्यमंत्री थे वह मात्र योजनाओं की घोषणा किए हैं। शिवराज सिंह के कार्यकाल में लगभग 150 घोटाले हुए जिनमें व्यापम घोटाला, उज्जैन कुंभ घोटाला, डीमेट घोटाला, जमीन घोटाला 1200 करोड रुपए का वजीफा घोटाला और ई-टेंडरिंग में 3000 करोड़ के घोटाले प्रमुख थे। कार्यालय कर्मचारियों के काली कमाई के अड्डे बन गए थे। अधिकारियों की अभद्रता और कर्मचारियों की कमीशन खोरी की दहशत से फरियादियों में हाहाकार था। प्रदेश के गाँव और गाली शराब, गाजा और कोरेक्स  के तस्करों के हवाले कर दिए  गए थे। खनन माफिया  और बालू माफिया  स्वयंभू सरकार थे। धार्मिक तथा जाति उन्माद और जुमलों के जाल के दलदल में प्रदेश को धकेल दिया था।
आशा है नई सरकार के नए ढर्रे में चलने की।
उमेश तिवारी सीधी (म.प्र.)

Post A Comment: