देश मे रोज 134 बच्चियों से बलात्कार सुप्रीम कोर्ट भी हैरान

*हर माह 4 हजार बच्चियाँ दुष्कर्म की शिकार*
*उ प्र नंबर वन और म प्र नबंर दो पर*
चेतन ठठेरा
भीलवाड़ा/ देश मे बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं लगातार बढती जा रही है इस पर लगाम लगा पाने मे देश की सरकारें पूरी तरह से नाकाम हो रही है । अगर देश मे बच्चियों से बलात्कार की घटनाओं पर नजर डाले तो हर माह देश मे 4 हजार बच्चियाँ दुष्कर्म की शिकार हो रही है यानि कि हर रोज  करीब 134 बच्चियों को दुष्कर्म का शिकार बनाया जा रहा है । सुप्रीम कोर्ट इन आंकड़ो को देखकर चौंक गया की यह क्या हो रहा है । सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए स्व प्रसंज्ञान लिया और बकायदा एक वरिष्ठ वकील को न्यायमित्र नियुक्त करते हुए कल यानी सोमवार को सुझाव मांगा है । केंद्र और राज्य सरकारें ढींगे हांकती   रहती हैं कि बेटियां अब पढ़ रही हैं. बरसों से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान चल रहा है.। सरकारें कह रही हैं कि काम युद्धस्तर पर चल रहा है. लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि बेटियों के लिए वाक़ई युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं. जहां बेटियों को ख़ुद ही बचना है, और बच सकें तो पढ़ना है.।मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से आंकड़े जुटाने को कहा था. आंकड़े किस बात के? बच्चियों के साथ बलात्कार के. नाबालिग बच्चियों के साथ. चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने कहा था कि आंकड़ों में दो चीज़ें होनी चाहिए. पहला कि पिछले 6 महीनों में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार के कितने मामले हुए. दूसरा, कितने मामलों में न्याय हो चुका है.।
सुप्रीम कोर्ट इन आंकड़ों को देखकर हैरत में आ गई, इतनी तेज़ी से बढ़ते क्राइम चार्ट पर अब ख़ुद ही याचिका डाली है और एक न्यायमित्र भी नियुक्त किया गया है ।जो आंकड़े आए वो दिल दहलाते हैं. एकबारगी यक़ीन नहीं होता कि हालात इतने ख़राब हो चुके हैं. यक़ीन नहीं होता कि जब हम सड़कों पर धर्म मज़हब जात की लड़ाइयां लड़ रहे थे, तब हमारी बच्चियां दबोची जा रही थीं.
मुख्य न्यायाधीश ने 12 जुलाई को कहा कि मीडिया में आ रही लगातार बच्चों से बलात्कार की घटनाओं से आहत होकर सुप्रीम रजिस्ट्री से आंकड़े जुटाने को कहा गया था. कोर्ट ने कहा था कि पूरे देश में पहली जनवरी से 30 जून के बीच ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर और की गई कानूनी कार्रवाई के आंकड़े जुटाए जाएं. रजिस्ट्री ने देश के सभी हाइकोर्ट से आंकड़े मंगाए और याचिका तैयार की.। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने बताया कि एक जनवरी से 30 जून तक देशभर में बच्चों से दुष्कर्म की 24,212 एफआईआर दर्ज हुई हैं. इनमें से 11981 मामलों में जांच चल रही है, जबकि 12231 केस में चार्जशीट पेश हो चुकी है लेकिन ट्रायल सिर्फ 6449 मामलों में ही शुरू हुआ है. इनमें भी सिर्फ चार फीसदी यानी 911 मामलों का निपटारा हुआ. अदालत ने वरिष्ठ वकील वी गिरि को न्याय मित्र नियुक्त किया है. जस्टिस रंजन गोगोई ने एडवोकेट गिरी से कहा है कि  ‘आप आंकड़ों का अध्ययन करें और सोमवार को सुझाव दें कि अदालत क्या निर्देश जारी कर सकती है’
बच्चों के यौन उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पहल पर तैयार सूची में उत्तर प्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है. जी हां, योगी का उत्तर प्रदेश. डायरेक्ट इनकाउंटर वाला प्रदेश. अगर उत्तर प्रदेश के ये आंकड़े आपको शर्म करने पर मजबूर कर रहे हैं, तो आपकी शर्म ये जानकर दोगुनी हो जाएगी कि उत्तर प्रदेश पुलिस को भी इन आंकड़ों में नंबर वन कहा गया है. लेकिन ‘ऐक्शन ना लेने में नंबर वन’. यहां 50 फीसदी से ज्यादा केसों में 1779 में जांच चल रही है जो बेहद ढीली है. मध्यप्रदेश 2389 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है और यहां पुलिस में थोड़ी तेजी देखने को मिलती है. 1841 केसों में चार्जशीट पेश हो गई है.

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