कहते हैं कि मंजिल नहीं मिलती है जिनमें जान होती है पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती आपको ऐसे युवा चिकित्सक से मिलवाने जा रहे हैं
जिन्होंने चंपारण को अपना कार्यक्षेत्र ही नहीं बनाया बल्कि लोगों के दिल में भी अपनी जगह बनाई पैसा कमाना इस चिकित्सक का उद्देश्य उद्देश्य मरीजों के चेहरे पर मुस्कान के साथ याद दिलाना है चिकित्सक को धरती का भगवान का दर्जा दिया जाता है पर आज के युग में चिकित्सा सेवा भी बर्बाद की चपेट में आ चुका है बिहार के मोतिहारी जिले के बंजरिया प्रखंड के मुखलिसपुर के एक किसान परिवार से आने वाले चंपारण के समाज सेवी चिकित्सक गोपाल कुमार सिंह मैं बड़े निजी अस्पतालों में जॉब ऑफर को छोड़कर सेवा की भावना से बापू की कर्मभूमि मोतिहारी को अपना चिकित्सा का कार्यक्षेत्र बनाया श्री रामा शंकर सिंह और श्रीमती पूनम देवी के घर पुत्र रत्न के रूप में जन्मे डॉ गोपाल सिंह मुखलिसपुर गांव के मूल निवासी हैं कि प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में ही शुरू हुई उसके बाद कॉलेज की शिक्षा मोतिहारी में हुई इसके बाद इन्होंने भगवान बुद्ध की ज्ञान प्राप्त करने के बाद मरीजों की सेवा में 24 साल की उम्र में ही इन्होंने चंपारण बिहार के मरीजों के दर्द मुक्त बनाने के उद्देश्य से मोतिहारी में गौतम बुध दर्द उपचार क्लीनिक के नाम से अपने क्लीनिक का शुभारंभ किया 15 दिसंबर 2015 बिहार सरकार के पूर्व मंत्री के द्वारा क्लीनिक का उद्घाटन किया गया प्रत्येक महीने के प्रथम रविवार को गरीब मरीजों का चेकअप किया जाता है गोपाल ने बताया कि सेवा एवं सहयोग से चंपारण समाज के नाम से एक सामाजिक संगठन बनाया गया है गोपाल संस्थापक से चिकित्सा शिविर का आयोजन भी किया जा चुका है गोपाल के द्वारा अभी तक ना श्याम जोड़ों के दर्द संबंधित से करो निराश मरीजों का सफल इलाज किया गया है उनके द्वारा गरीब असहाय मरीजों के उपचार शुल्क में रियायत दिया जाता है उन्होंने बताया कि स्लिप डिस्क साइटिका घुटना दर्द जोड़ों के दर्द से छुटकारा संभव है अगर मरीज को सही समय से इलाज के लिए लाया जाए उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक का पैसा कमाना नहीं समाज सेवा करना भी उचित चिकित्सा हैं चिकित्सा सेवा में रहते हुए उन्होंने प्रतिवर्ष गरीबों के लिए ठंड के मौसम में कंबल वितरण अभियान का भी शुरुआत किया गोपाल कहते हैं कि समाज के लिए कुछ करने से दिल में सुकून मिलता है


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