यूं तो भाजपा और जदयू के नेता अक्सर बयान देकर गठबंधन में घमासान मचाते रहते हैं लेकिन जब मुद्दा सीधे वोट बैंक से जुड़ा हो तो समझिये की हमला होने तय है। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन एनआरसी को लेकर अलग-अलग पार्टियों की अपनी-अपनी राय है।
गौरतलब है कि असम में इसका प्रयोग किया गया है और फिलहाल 19 लाख लोग नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की सूची में नहीं आ पाए हैं। इसे लेकर पूरे देश में राजनीतिक बहस जारी है। लेकिन भाजपा इसको लेकर अड़ी हुई है। इसी कड़ी में भाजपा के राज्यसभा सदस्य और आरएसएस के पदाधिकारी राकेश सिन्हा ने बिहार में भी एनआरसी की वकालत की है। राकेश सिन्हा ने बताया है की असम की तर्ज पर बिहार के सीमावर्ती इलाके में एनआरसी लागू किए जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जिस तरीके से बीते वर्षों में सीमांचल इलाकों में आबादी बढ़ी है उससे यह स्पष्ट होता है कि काफी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक भारत के इलाके में घुस आए हैं ।
राकेश सिन्हा ने कहा कि खासकर किशनगंज पूर्णिया कटिहार और अररिया जिला में तो सख्त रूप से एनआरसी करवाने की जरूरत है। राकेश सिन्हा के इस वक्तव्य की सूचना जैसे ही जदयू खेमे में पहुंचे तो हड़कंप मच गया। मुद्दा अल्पसंख्यकों के वोट बैंक से संबंधित था तो लगे हाथ जदयू के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि बिहार में इसकी कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जदयू किसी भी हाल में दूसरे देश के नागरिकों को बाहर निकाले जाने के सख्त खिलाफ है साथ ही यह भी कहा एनआरसी को दूसरे राज्यों में लागू किए जाने की जरूरत नहीं है।


Post A Comment: