विनय कुमार मिश्र गोरखपुर ब्यूरों।
10 अक्टूबर से शुरू हो रहा शारदीय नवरात्र इस बार खास रहेगा। पंडित शरदचंद्र मिश्र बताते हैं कि इस बार माँ दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रहा है। उनका गमन हाथी पर होगा। इन दोनों स्थितियों में दुर्गा पूजन बड़ा शुभ हो जाता है। वह कहते हैं कि बंगाली मत के हिसाब से दुर्गा का आगमन पहले ही दिन से माना जाता है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में मां दुर्गा का आगमन सप्तमी तिथि यानी सातवें दिन से लिया जाता है। इस दिन मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। पंडित शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि माँ दुर्गा का घोड़े पर आना शुभ होता है। यदि दुर्गा पालकी पर आती हैं तो कठिनाइयां का दौर शुरू हो जाता है। वह बताते हैं कि 10 अक्टूबर को सूर्याेदय 6 बजकर 12 मिनट पर हो रहा है। प्रतिपदा तिथि प्रात: 7 बजकर 56 मिनट पर है इसके बाद द्वितीय तिथि लग रही है।
*कलश स्थापना* पंडित शरदचंद्र मिश्र बताते हैं कि शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना का सबसे अच्छा मुहूर्त प्रात: 6 बजकर 12 मिनट से प्रात: 6 बजकर 29 मिनट तक, इसके बाद 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है। इसके बाद 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 8 मिनट तक धनु लग्र एवं सायंकाल 4 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 53 मिनट तक मीन लग्र है। देवी के निमित्त कलश की स्थापना द्विस्वभाव लग्र एवं अभिजीत मुहूर्त में किया जाता है। इसके लिए चर लग्न एवं स्थिर लग्र वर्जित माना गया है। उन्होंने बताया कि 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक कलश स्थापना के लिए सबसे बेहतर है। इस वर्ष नवरात्र पूरे नौ दिनों का है। प्राय: देखा जाता है कि नवरात्र 8 या 10 दिन के होते हैं। पूरे नौ दिनों का नवरात्र सामाजिक सौम्यता में वृद्धि करेगा। उन्होंने बताया कि नवरात्र का राशियों से कोई संबंध नहीं है। इसे बनावटी तौर पर लिखा जाता है। यह भ्रम की बाते हैं।अष्टमी तिथि 17 अक्टूबर को है। जो नवरात्र के पहले और अंतिम दिन व्रत रखते हैं वे पहले दिन 10 अक्टूबर और अष्टमी तिथि 17 अक्टूबर को व्रत रखेंगे। 18 अक्टूबर को महानवमी का पर्व है। इस दिन नवमी तिथि दिन में 2 बजकर 31 मिनट तक है। नौ दिन व्रत रहने वाले इसी दिन हवन संपन्न कर 2 बजकर 31 मिनट के बाद पारण करेंगे।

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