गंगा की रक्षा के लिए एक और संत ने अपना बलिदान दे दिया.
वैज्ञानिक से संत बने अनशनरत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द की गुरुवार को ऋषिकेश के एम्स हॉस्पिटल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. स्वामी सानंद पिछले 112 दिनों से गंगा की रक्षा और अपनी मांगों को लेकर हरिद्वार के मातृ सदन आश्रम में अनशन कर रहे थे. उनकी बिगड़ती हालात को देखते हुए बुधवार को ही उन्हें प्रशासन ने जबरन अनशन से उठाकर ऋषिकेश एम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया था.

एम्स से ही गुरुवार सुबह 6.45 बजे स्वामी सानन्द ने हस्तलिखित प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी. जिसमें उन्होंने अपना अनशन जारी रखने के लिए एम्स के डॉक्टरों द्वारा सहयोग किए जाने पर उनका धन्यवाद किया था.

सानन्द ने लिखा था कि डॉक्टरों ने उन्हें कहा था कि उनके सामने उनका जीवन बचाने के लिए फोर्स फीडिंग का भी विकल्प है. मगर डॉक्टरों की सलाह पर सानन्द ने 500 एमएल तरल मुंह एयर ड्रिप के जरिए लेने पर अपनी सहमति दे दी थी. सानन्द की सेहत के लिए तुरंत तरल पदार्थ दिया जाना जरूरी था क्योंकि उनके शरीर में जरूरी पोटेशियम की मात्रा 3.5 से घटकर 1.7 ही रह गई थी.

गंगा की निर्मलता और अविरलता बनाए रखने के लिए अपनी मांगों को लेकर कानपुर आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द हरिद्वार के मातृ सदन आश्रम में 22 जून से अनशन पर बैठे हुए थे. इस बीच कुछ केंद्रीय मंत्री, सांसद भी आकर उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध कर चुके थे. मगर सानन्द ने गंगा के लिए संसद में कानून बनाने तक अनशन खत्म करने को तैयार नहीं थे.

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