मुख्य संपादक कृष्ण कुमार संजय
समस्तीपुर । शहर में करीब तीन सौ से अधिक कोचिग संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। दर्जनभर कोचिग संस्थानों को छोड़ दें तो अधिकांश के पास न तो सही से भवन है और न हीं पठन-पाठन की व्यवस्था ही। संकरी गली-मोहल्लों में संचालित इन कोचिग संस्थानों में अगलगी से बचाव को लेकर भी कोई व्यवस्था नहीं है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि इसमें से अधिकांश कोचिग संस्थान बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित किए जा रहे हैं। कोचिग संस्थान सुरक्षा मानकों को पूरी तरह अनदेखी कर रहा है।

बता दें कि पिछले एक दशक में समस्तीपुर कोचिग संस्थानों का उत्तर बिहार का हब बन गया है। उत्तर बिहार के कई जिले के विद्यार्थी यहां के कोचिग संस्थानों में अध्ययन करते हैं। काशीपुर मुहल्ला तो कोचिग संस्थानों का केंद्र बिंदु है। हालांकि पूरे शहर में जगह-जगह कोचिग संस्थान खुले हुए हैं। कोई एक कमरे में कोचिग चला रहा है तो कोई बरामदे पर इसे संचालित करता है। अधिकांश के पास अपना सही से भवन तक नही है। कोचिंग संस्थानों में सुविधाओं का भारी अभाव कोचिंग संस्थान ऐसे जगहों पर संचालित किए जा रहे हैं जहां अगलगी की घटना होने पर दमकल गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती हैं।

आश्चर्य की बात तो यह है कि इन कोचिग संस्थानों के पास शौचालय तक नहीं है। पढ़ने के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए पानी पीने की व्यवस्था तक का अभाव है। ऐसे में अग्निशमनण यंत्र व्यवस्था रहना अपने आपक में सोचनीय है। इससे भी बड़ी बात यह है कि दर्जनभर के करीब कोचिग संस्थान ही थोड़ा-बहुत सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं। बाद बाकी सुरक्षा की अनेदखी कर कोचिग संचालित कर रहे हैं।


नियमों की होती अनदेखी

सरकार का आदेश है कि किसी भी संस्थान का रजिस्ट्रेशन तभी हो सकता है, जब वह अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त कर सके। अग्निशमन विभाग भी इन कोचिग संस्थानों या स्कूलों में कभी भी इन चीजों का निरीक्षण करने के लिए नहीं पहुंचती है। जिससे कोचिग संचालक अपनी मर्जी से कोचिग संचालित करते हैं। बता दें कि शहर के मात्र दो दर्जन कोचिग संस्थानों का ही रजिस्ट्रेशन है। इसके बाद सभी बगैर रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहे हैं। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ही कोचिग संस्थानों को जांच कराने के बाद रजिस्ट्रेशन की अनुमति देती है। इसके बाद ही शिक्षा विभाग के द्वारा पंजीयन किया जाता है।
जानकार लोगों का कहना है कि यदि ससमय प्रसासन जागरूक नही हुआ तो
समस्तीपुर में भी हो सकती हैं सूरत जैसी घटना, शहर के कोचिग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की हो रही अनदेखी।

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