उपजिलाधिकारी के आदेश पर भारी तहसीलदार का आदेश।
एसडीएम ने स्टे किया निरस्त तो तहसीलदार ने रोका निर्माण।
विनय कुमार मिश्र,गोरखपुर ब्यूरों ।जनपद के कैम्पियरगंज तहसील के राजपुर गांव में निर्माण कार्य रोकने के स्थगन आदेश के मामले में एसडीएम न्यायालय द्वारा स्टे खारिज करने के बाद तहसीलदार द्वारा निर्माण को रोकने का रोचक मामला प्रकाश में आया है।एसडीएम के आदेश पर तहसीलदार के हाबी होने से लोग पशोपेश में है।आखिर ये क्या और क्यों हो रहा है।मालुम हो कि कैम्पियरगंज के राजपुर गाँव के सुबाष धोबी अपनी भूमि में झोपड़ी डालकर रहते हैं। विगत वर्ष उनकी झोपड़ी जल गयी या जला दी गयी।आपदा राहत से तहसील से उसे अहेतुक सहायता भी मिली। इस वर्ष अपनी भूमि पर वह निर्माण कार्य शुरू किया तो गाव के विश्वनाथ आदि बनाम सुबाष एसडीएम न्यायालय में वाद दाखिल कर धारा 76 के तहत स्थाई निषेधाज्ञा व स्थाई रूप से निर्माण कार्य रोके जाने का अनुरोध किया गया।उपजिलाधिकारी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रतिवादी सुबाष ने गाँव सभा एण्ड लैण्ड मैनेजमेंट कमेटी पेज 83 प्रस्तुत कर अदालत को ध्यान दिलाया।जिस पर अदालत ने उभय पक्षों के वाद की पोषणीयता के विन्दु पर दिये गये तर्कों व प्रस्तुत विधि व्यवस्था तथा पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन के बाद यह प्रकाश में आया कि प्रश्नगत भूमि ग्रामसभा की आराजी नहीं है।जिस पर उप जिलाधिकारी मजिस्ट्रेट एके राय ने धारा 123 (1) उ.प्र.ज.वि. अधि.आधार पर धारा 76 उ.प्र.रा. संहिता -6 के अन्तर्गत वादी को कोई अनुतोष दिया जाना विधिक व न्यायोजित नहीं मानते हुए 29 सितम्बर को वाद को खारिज कर दिया तो सुबाष ने निर्माण शुरू करा दिया।गाँव के महावीर ने 5अक्टूबर को तहसीलदार संजीव दीक्षित को शिकायती पत्र देकर कहा गया कि आराजी 240मिलजुमला नम्बर है।आरिजी 240क रकबा 0.0968 हे. व आराजी 240ख रकबा 0.037हे. ग्राम समाज भूमि है।आराजी 240 में बिना सीमांकन के सुबाष अवैध ढंग से भूमि हड़पने की नियति से निर्माण करा रहे हैं। निर्माण रोका जाय।जिस पर तहसीलदार ने कानूनगों को जांच कर अवैध निर्माण रोकने व अतिक्रमण हटाने का निर्देश दे दिया।इतना ही 6अक्टूबर को सुबाष ने समाधान दिवस में थाने पहुँचकर तहसीलदार को एसडीएम का आदेश भी दिखाया लेकिन तहसीलदार ने एसडीएम का आदेश मानने से इंकार करते हुए निर्माण को रोकवा दिया।

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