कोसी तथा करेह के उफनाने से डेड दर्जन गांव के लोग हुए घरों में कैद
पलटन साहनी की रिपोर्ट
समस्तीपुर जिला के रोसड़ा अनुमंडल बिथान:प्रखंड मैं कोसी तथा करेह नदी के उफनाने से प्रखंड के बेलसंडी,नरपा, सलहा चंदन तथा सलहा बुजुर्ग पंचायत के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से लोग दहशत में हैं ।हालात यह है कि डेड दर्जन गांव टापू में तब्दील हो गए हैं जिससे बाढ प्रभावित भाग्य के भरोसे जी रहे हैं। लोग ऊंचे जगहों की तलाश में हैं ।प्रशासन द्वारा अब तक कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही है जिससे बाढ़ प्रभावित भगवान भरोसे हैं। लोग निजी नाव के सहारे आ जा रहे हैं ।चारों पंचायत के अधिकांश गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह से गिर चुके हैं ।ऐसे में बाढ़ पीड़ितों की समस्या का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है ।अभी नाव की सख्त जरूरत है लेकिन प्रशासन बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनशील नहीं है ।गांव के लोग बाढ़ के कारण सुरक्षित स्थानों की तलाश में है तथा कुछेक वाटरवेज बाँध पर आश्रय लिए हुए हैं। बाँध पर खाने-पीने की व्यवस्था के अभाव में लोग मुश्किल से जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।अभी तक राहत कार्य नहीं चलाए जाने से बाढ़ पीड़ितों में खासा रोष व्याप्त है। बाढ़ पीड़ितों को सबसे ज्यादा परेशानी आवागमन की है। सरकारी नाव की व्यवस्था थ नहीं रहने के कारण जरूरत के सामानों को जुटाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव के चारों ओर से पानी से घिर जाने के बाद पशु भी पलायन कर गए हैं ।यदि कुछ पशु गांव के ऊंचे स्थानों पर है भी तो उसे चारा नहीं मिल रहा है। पशुपालकों को स्वयं के साथ-साथ अपने पशुओं की भी चिंता सता रही है जिससे बाढ़ पीड़ित दोहरी मार झेल रहे हैं ।
नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद बाढ़ पीड़ितों के लिए मुसीबतों का पहाड़ बनकर आई है। चारों ओर पानी ही पानी रहने के कारण लगभग डेड दर्जन गांव के लोग अपने घर व टोले में ही कैद हो गए हैं। लोग अब अपने घरों को छोड़कर बाहर निकलना भी नहीं चाह रहे हैं क्योंकि घर के बाहर पानी जमा होने से बच्चों के गहरे पानी में चले जाने का भय सता रहा है।इन गांव के ग्रामीण बताते हैं उन लोगों को ऊंचे शरणस्थली के रुप में स्कूल था लेकिन स्कूल परिसर में भी पानी रहने के कारण हुए लोग वहां भी नहीं रह सकते हैं।
नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से सड़कों पर भी नदी का पानी बहने लगा है ।जिससे बेलसंडी से आगे मुख्य सड़क पूर्णतः जलमग्न है। लोग खुले जगहों पर खुले आसमान के नीचे शरण लिए हुए हैं ।इस दौरान बारिश होने से लोगों की समस्या और बढ़ जाती है। बाढ़ के कारण परिसर में पानी आ जाने से स्कूल बंद है तथा पठन पाठन ठप है।
पलटन साहनी की रिपोर्ट
समस्तीपुर जिला के रोसड़ा अनुमंडल बिथान:प्रखंड मैं कोसी तथा करेह नदी के उफनाने से प्रखंड के बेलसंडी,नरपा, सलहा चंदन तथा सलहा बुजुर्ग पंचायत के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से लोग दहशत में हैं ।हालात यह है कि डेड दर्जन गांव टापू में तब्दील हो गए हैं जिससे बाढ प्रभावित भाग्य के भरोसे जी रहे हैं। लोग ऊंचे जगहों की तलाश में हैं ।प्रशासन द्वारा अब तक कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही है जिससे बाढ़ प्रभावित भगवान भरोसे हैं। लोग निजी नाव के सहारे आ जा रहे हैं ।चारों पंचायत के अधिकांश गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह से गिर चुके हैं ।ऐसे में बाढ़ पीड़ितों की समस्या का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है ।अभी नाव की सख्त जरूरत है लेकिन प्रशासन बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनशील नहीं है ।गांव के लोग बाढ़ के कारण सुरक्षित स्थानों की तलाश में है तथा कुछेक वाटरवेज बाँध पर आश्रय लिए हुए हैं। बाँध पर खाने-पीने की व्यवस्था के अभाव में लोग मुश्किल से जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।अभी तक राहत कार्य नहीं चलाए जाने से बाढ़ पीड़ितों में खासा रोष व्याप्त है। बाढ़ पीड़ितों को सबसे ज्यादा परेशानी आवागमन की है। सरकारी नाव की व्यवस्था थ नहीं रहने के कारण जरूरत के सामानों को जुटाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव के चारों ओर से पानी से घिर जाने के बाद पशु भी पलायन कर गए हैं ।यदि कुछ पशु गांव के ऊंचे स्थानों पर है भी तो उसे चारा नहीं मिल रहा है। पशुपालकों को स्वयं के साथ-साथ अपने पशुओं की भी चिंता सता रही है जिससे बाढ़ पीड़ित दोहरी मार झेल रहे हैं ।
नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद बाढ़ पीड़ितों के लिए मुसीबतों का पहाड़ बनकर आई है। चारों ओर पानी ही पानी रहने के कारण लगभग डेड दर्जन गांव के लोग अपने घर व टोले में ही कैद हो गए हैं। लोग अब अपने घरों को छोड़कर बाहर निकलना भी नहीं चाह रहे हैं क्योंकि घर के बाहर पानी जमा होने से बच्चों के गहरे पानी में चले जाने का भय सता रहा है।इन गांव के ग्रामीण बताते हैं उन लोगों को ऊंचे शरणस्थली के रुप में स्कूल था लेकिन स्कूल परिसर में भी पानी रहने के कारण हुए लोग वहां भी नहीं रह सकते हैं।
नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से सड़कों पर भी नदी का पानी बहने लगा है ।जिससे बेलसंडी से आगे मुख्य सड़क पूर्णतः जलमग्न है। लोग खुले जगहों पर खुले आसमान के नीचे शरण लिए हुए हैं ।इस दौरान बारिश होने से लोगों की समस्या और बढ़ जाती है। बाढ़ के कारण परिसर में पानी आ जाने से स्कूल बंद है तथा पठन पाठन ठप है।


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